कुशीनगर : रामकोला क्षेत्र में 20 मार्च के शाम को जिस घटना को लूट बताकर सनसनी फैलाई गई थी, वह पूरी तरह फर्जी निकली। गहराई से जांच में सामने आया कि यह साजिश गांजा तस्करी के काले धन को आपस में बांटने और छिपाने के लिए रची गई थी। मामले में पुलिस के ही चार सिपाहियों की संलिप्तता उजागर हुई है।
दर्ज एफआईआर 131/26 के अनुसार, सिपाही सूरज गिरी इस पूरे खेल का सह मास्टरमाइंड है। उसके साथ सिपाही जितेंद्र, विनोद और नितेश भी इस संगठित गिरोह में शामिल थे। ये चारों सिपाही करीब 8 तस्करों के साथ मिलकर अवैध गांजा तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे।और यह चारों पुलिस कर्मी इस अवैध कार्य में एक वर्ष से ज्यादा समय से सक्रिय थे।
शुरुआती जांच में इसे साधारण लूट की वारदात माना गया था, शिकायत कर्ता सुन्दर लाल निषाद से जब मामले में पुलिस ने पूछताछ और जाँच शुरू की तो यह मामला लूट का न होकर गांजा तस्करी से जुड़ा बड़ा गिरोह मिला जिसमे पुलिस के 04 सिपाही भी शामिल मिले।
मामले का भंडाफोड़ होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस विभाग की छवि पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चारों आरोपित सिपाहियों के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया गया है। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही, पुलिस उन सभी तस्करों की तलाश में जुट गई है जो इस सिंडिकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

