Tuesday, October 4, 2022
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कुशीनगर जिला

कुशीनगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला एवं एक छोटा सा कस्बा है। इस जनपद का मुख्यालय कुशीनगर से करीब 15 किमी दूर पडरौना में स्थित है। कुशीनगर जिला पहले देवरिया जिले का भाग था। कुशीनगर जिले के पूर्व में बिहार राज्य, दक्षिण-पश्चिम में देवरिया जिला, पश्चिम में गोरखपुर जिला, उत्तर-पश्चिम में महराजगंज जिला स्थित हैं। कुशीनगर जिले में ग्रामों की संख्या 1446 हैं।

कुशीनगर का इतिहास…

हिमालय की तराई वाले क्षेत्र में स्थित कुशीनगर का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन व गौरवशाली है। वर्ष 1876 ई0 में अंग्रेज पुरातत्वविद ए कनिंघम ने आज के कुशीनगर की खोज की थी। खुदाई में छठी शताब्दी की बनी भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा मिली थी इसके अलावा रामाभार स्तूप और और माथाकुंवर मंदिर भी खोजे गए थे। वाल्मीकि रामायण के मुताबिक यह स्थान त्रेता युग में भी आबाद था और यहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के पुत्र कुश की राजधानी थी जिसके चलते इसे कुशावती के नाम से जाना गया। पालि साहित्य के ग्रंथ त्रिपिटक के मुताबिक बौद्ध काल में यह स्थान षोड्श महाजनपदों में से एक था और मल्ल राजाओं की यह राजधानी।

तब इसे कुशीनारा के नाम से जाना जाता था। पांचवी शताब्दी के अंत तक या छठी शताब्दी की शुरूआत में यहां भगवान बुद्ध का आगमन हुआ था। कुशीनगर में ही उन्होंने अपना अंतिम उपदेश देने के बाद महापरिनिर्माण को प्राप्त किया था। कुशीनगर से 16 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में मल्लों का एक और गणराज्य पावा था। यहाँ बौद्ध धर्म के समानांतर ही जैन धर्म का प्रभाव था। माना जाता है कि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर जैन (जो बुद्ध के समकालीन थे) ने पावानगर (वर्तमान में फाजिलनगर) में ही परिनिर्वाण प्राप्त किया था। इन दो धर्मों के अलावा प्राचीन काल से ही यह स्थल हिंदू धर्मावलंम्बियों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुप्तकाल के तमाम भग्नावशेष आज भी जिले में बिखरे पड़े हैं इनमें तकरीबन डेढ़ दर्जन प्राचीन टीले हैं जिसे पुरातात्विक महत्व का मानते हुए पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित कर रखा है। उत्तर भारत का इकलौता सूर्य मंदिर भी इसी जिले के तुर्कपट्टी में स्थित है। भगवान सूर्य की प्रतिमा यहां खुदाई के दौरान ही मिली थी जो गुप्तकालीन मानी जाती है। इसके अलावा भी जनपद के विभिन्न हिस्सों में अक्सर ही जमीन के नीचे से पुरातन निर्माण व अन्य अवशेष मिलते ही रहते हैं। कुशीनगर जनपद का जिला मुख्यालय पडरौना है जिसके नामकरण के संबंध में यह कहा जाता है कि भगवान राम विवाह के उपरांत पत्नी सीता व अन्य सगे-संबंधियों के साथ इसी रास्ते जनकपुर से अयोध्या लौटे थे। उनके पैरों से रमित धरती पहले पदरामा और बाद में पडरौना के नाम से जानी गई।

जनकपुर से अयोध्या लौटने के लिए भगवान राम और उनके साथियों ने पडरौना से 10 किलोमीटर पूरब से होकर बह रही बांसी नदी को पार किया था। आज भी बांसी नदी के इस स्थान को रामघाट के नाम से जाना जाता है। हर साल यहां भव्य मेला लगता है जहाँ उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों श्रद्धालु आते हैं। बांसी नदी के इस घाट को स्थानीय लोग इतना महत्व देते हैं कि सौ काशी न एक बांसी की कहावत ही बन गई है। मुगल काल में भी यह जनपद अपनी खास पहचान रखता था।

कुशीनगर में तहसीलें…

कुशीनगर जिले में 6 तहसीलें हैं – पडरौना, कुशीनगर, हाटा, तमकुहीराज , खड्डा, कप्तानगंज शामिल है.

कुशीनगर में ब्लाक या विकासखण्ड

कुशीनगर जिले में 15 विकासखण्ड हैं – पडरौना, बिशुनपुरा, कुशीनगर, हाटा, मोतीचक, सेवरही, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, दुदही, फाजिल नगर, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला और तमकुहीराज।

कुशीनगर के प्रमुख पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थल

कुशीनगर का परिनिर्वाण मंदिर

कुशीनगर में मुख्य रूप से महापरिनिर्वाण मंदिर, रामाभार स्तूप तथा माथाकुँवर मंदिर है। इसके अलावा जिले में मुख्य रूप से कुछ सांस्कृतिक तथा धार्मिक स्थान हैं।

तुर्कपट्टी का सूर्य मंदिर

तुर्कपट्टी बाजार से लगभग 800 मीटर दक्षिण की ओर एक सूर्य मंदिर है। कुशीनगर का ‘कोणार्क’ कहे जाने वाले इस स्थान पर मिले सूर्य प्रतिमा की कथा सुदामा शर्मा से जुड़ी है। परिवार के लोगों के आकस्मिक निधन से परेशान श्री शर्मा ने रात में सपना देखा। स्वप्न में देखे गए स्थान की खुदाई में नीलमणि पत्थर की दो खंडित प्रतिमाएं मिली। अध्ययन के बाद इतिहासकारों ने बताया कि इनमें मिली मूर्तियां गुप्तकालीन हैं। एक प्रतिमा सूर्यदेव की है। 24 अप्रैल 1998 को इस प्रतिमा की चोरी हो गई थी, लेकिन पुलिस के प्रयास से प्रतिमा को बरामद कर लिया गया। अब यहां मंदिर बन चुका है। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहता है। इस मूर्ति की विशेषता है कि सूर्य के उगने के साथ ही मूर्ति की चमक बढ़ती है और दोपहर बाद मूर्ति की चमक मंद पड़ने लगती है।

कुशीनगर में गन्ना उत्पादन…

यहां गन्ने की सर्वाधिक खेती की जाती है। अतः यहां चीनी मिलों की अधिकता है। इस जिले में निम्न स्थानों पर मिलें स्थापित की गयी है- सेवरही, पडरौना, खड्डा, कप्तानगंज, रामकोला (02), लक्ष्मीगंज, कटकुंइयाँ, छितौनी,हाटा ढाडा मिल है.परन्तु इनमे अधिकतर बंद पड़ी है.

सौजन्य – विकिपीडिया से  

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