कुशीनगर : नियति ने दो भाइयों को 46 साल पहले अलग कर दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश के शामली जिले में रह रहे बुजुर्ग को निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया (‘SIR’) ने उन्हें एक बार फिर कुशीनगर जिले के खड्डा ब्लॉक के सिसवा गोपाल गांव की मिट्टी तक खींच लाई।
बात 46 साल पुरानी है। खड्डा ब्लॉक के सिसवा गोपाल गांव के रहने वाले तैय्यब का किसी बात पर अपने भाई से तीव्र मनमुटाव और झगड़ा हो गया।
तैय्यब ने आवेश में आकर अपना घर छोड़ दिया। उस वक्त उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह दूरी इतनी लंबी हो जाएगी।घर छोड़ने के बाद, तैय्यब ने गुजरात और राजस्थान जैसे दूर-दराज के राज्यों में भटकते हुए जीवन बिताया।
अंततः उन्हें उत्तर प्रदेश के शामली जिले में अपना ठिकाना मिला और वह वहीं रहने लगे।शामली में रहने के दौरान, तैय्यब निर्वाचन आयोग द्वारा चल रहे (SIR) के दायरे में आए। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें कुछ महत्वपूर्ण फॉर्म भरने थे, और इस दौरान उन्हें अपने मूल निवास, यानी कुशीनगर के सिसवा गोपाल गांव का विवरण देना था।
यहीं से उनके नियति का पहिया घूमा।SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया के चलते, 46 साल बाद तैय्यब ने वापस अपने गांव, सिसवा गोपाल की धरती पर कदम रखा।
वहां पहुंचते ही उन्होंने अपने बिछड़े हुए भाई की खोजबीन शुरू की।जब वर्षों से बिछड़े दोनों भाइयों का आमना-सामना हुआ, तो वे अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए।
साथ ही परिवार के लोगों ने SIR प्रक्रिया की सराहना की जिससे कि इस कारण बिछड़े भाई घर की और लौटे और इनसे मिलना हुआ।